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*कोई पत्रकार छोटा या बड़ा नहीं होता: चित्रा त्रिपाठी के बयान पर ND Live की खास रिपोर्ट, मीडिया में आपसी एकता और भाईचारे की उठी आवाज़ | ND Live* *लखनऊ से सलाउद्दीन खान रिपोर्ट*

📍 उत्तर प्रदेश (नई दिल्ली) 📅 23 Jul 2026 ✍️ NDLIVE ब्यूरो
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*कोई पत्रकार छोटा या बड़ा नहीं होता: चित्रा त्रिपाठी के बयान पर ND Live की खास रिपोर्ट, मीडिया में आपसी एकता और भाईचारे की उठी आवाज़ | ND Live*

*लखनऊ से सलाउद्दीन खान रिपोर्ट*

लखनऊ/नई दिल्ली:

हाल ही में एबीपी न्यूज की जानी-मानी वरिष्ठ पत्रकार चित्रा त्रिपाठी द्वारा जंतर-मंतर और अन्य प्रदर्शनों के दौरान मीडिया पर हो रहे हमलों और ट्रोलिंग को लेकर दिए गए एक तीखे और बेबाक बयान ने देश भर के मीडिया जगत में एक नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने साफ कहा कि मीडिया का काम भीड़ तंत्र का हिस्सा बनना नहीं, बल्कि भीड़ में खड़े होकर सच दिखाना है। रिपोर्टर पर हाथ उठाने या हिंसा करने का अधिकार किसी को नहीं है।

लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बीच ND Live का नजरिया और भी स्पष्ट और व्यापक है। पत्रकारिता के इस दौर में चाहे कोई छोटे स्तर का डिजिटल रिपोर्टर हो, यूट्यूब पर काम करने वाला युवा पत्रकार हो या किसी बड़े चैनल का एंकर—मैदान पर हर पत्रकार हमारा भाई है। आज विडंबना यह है कि कुछ लोग आपसी होड़ या भेदभाव के चलते छोटे और बड़े पत्रकारों के बीच दूरियां बनाने की कोशिश करते हैं, जो कतई सही नहीं है। पत्रकारिता में कोई छोटा या बड़ा नहीं होता, हर कलम और हर माइक का वजूद एक समान है। इस भेदभाव की दीवार को अब हमेशा के लिए खत्म करना होगा।

LUCKNOW / NEW DELHI:

A powerful and thought-provoking statement by veteran journalist Chitra Tripathi regarding the mounting attacks on reporters, online trolling, and the true essence of field journalism has sparked widespread discussions across the country. Addressing the challenges faced by ground reporters, she emphasized that a journalist's duty is to stand for truth, not to succumb to mob mentality.

However, weighing in deeply on this reality, ND Live believes that true strength lies in absolute fraternity. Whether it is an independent digital creator, a grassroots reporter, or a journalist working with a major television network—every single reporter on the field is our brother. Unfortunately, a prevailing culture of internal division and elitism often creates an unhealthy hierarchy between so-called 'small' and 'big' journalists. This mindset must end. In journalism, no one is small or big; every voice striving for the truth stands on equal ground.

"पत्रकारिता का असली धर्म एकता: कोई छोटा-बड़ा नहीं, हर रिपोर्टर हमारा भाई है!

चित्रा त्रिपाठी का यह बयान कि "मैं भीड़ तंत्र का हिस्सा नहीं, लोकतंत्र का हिस्सा हूँ" अपनी जगह बिल्कुल सही है, लेकिन आज के दौर में पत्रकारों के बीच की आपसी खींचतान और भेदभाव पर भी बड़ा सवाल खड़ा होता है। कुछ लोग डिजिटल और मेनस्ट्रीम पत्रकारों के बीच छोटा-बड़ा होने का फर्क पैदा करते हैं, जो कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

मैदान पर चाहे धूप में पसीना बहाने वाला कोई छोटा यूट्यूबर हो या बड़े चैनल का पत्रकार—मुसीबत में हर कोई एक ही मोर्चे पर खड़ा होता है। इसलिए, सभी पत्रकारों को अपनी आपसी बुराई और भेदभाव को छोड़कर एक रहना होगा। अगर हम खुद एकजुट नहीं होंगे, तो ताकतों और व्यवस्था के सामने कैसे टिकेंगे?

सच्ची पत्रकारिता और आपसी भाईचारे की इस अलख को जगाने के लिए ND Live हमेशा हर उस पत्रकार के साथ खड़ा है जो सच के लिए लड़ रहा है। इस खबर को पूरा पढ़ें और देश के हर पत्रकार तक शेयर कर एकता का संदेश दें! ????

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