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शून्य से शिखर तक: संघर्ष, सत्य और संकल्प की "महागाथा" . मिट्टी का लाल: प्रारंभिक जीवन और अग्नि-परीक्षा

📍 उत्तर प्रदेश (उत्तर प्रदेश लखनऊ ) 📅 11 Jul 2026 ✍️ NDLIVE ब्यूरो
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शून्य से शिखर तक: संघर्ष, सत्य और संकल्प की "महागाथा".मिट्टी का लाल: प्रारंभिक जीवन और अग्नि-परीक्षा उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के 'जमुई पंडित' गांव की माटी ने एक ऐसे व्यक्तित्व को गढ़ा है, जिसका जीवन चुनौतियों की भट्टी में तपकर कुंदन बना है। 01 जनवरी 1999 को जन्मे सलाउद्दीन खान का जीवन एक कठिन संघर्ष की दास्तां है। बचपन में जहाँ माँ का ममतामयी आँचल नसीब नहीं हुआ, वहीं पिता के साये और उनकी दुआओं ने सलाउद्दीन को कभी टूटने नहीं दिया। माँ की कमी ने उन्हें कमज़ोर नहीं, बल्कि दुनिया की हर चुनौती से टकराने के लिए फौलाद बना दिया।रगों में दौड़ता जुनून: जब लकड़ी का टुकड़ा बना 'माइक' जब हमउम्र बच्चे खिलौनों से खेलते थे, तब नन्हे सलाउद्दीन के हाथों में लकड़ी का एक टुकड़ा होता था, जिसे वे अपना काल्पनिक माइक मानते थे। बचपन की वही मासूम जिज्ञासा"सच को दुनिया के सामने लाना है"—आगे चलकर उनके जीवन का एकमात्र ध्येय बन गई। महराजगंज की गलियों में एक पुरानी साइकिल पर सवार होकर उन्होंने अपने सपनों का पीछा करना शुरू किया। उस साइकिल के पहियों के साथ सलाउद्दीन के बुलंद इरादों ने भी ऐसी रफ्तार पकड़ी कि उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।ND Live का उदय: निष्पक्षता की एक नई 'लिगेसी' विभिन्न राष्ट्रीय न्यूज़ चैनलों में वर्षों के कठोर अनुभव और पत्रकारिता की बारीकियों को समझने के बाद, सलाउद्दीन जी ने महसूस किया कि शोषितों और वंचितों की आवाज़ बनने के लिए एक निडर और स्वतंत्र मंच की अनिवार्य आवश्यकता है। इसी संकल्प का परिणाम हैND Live 01 जनवरी 2024: पत्रकारिता के नए सूर्य 'ND Live' की नींव रखी गई। 01 जनवरी 2026: डिजिटल क्रांति की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए चैनल की आधिकारिक वेबसाइट का वैश्विक शुभारंभ हुआ। स्तंभ और सारथी: टीम वर्क की शक्ति सलाउद्दीन खान जी के इस ऐतिहासिक सफर में सुमन दुबे (कार्यकारी अध्यक्ष एवं प्रधान संपादक) का योगदान एक अटूट चट्टान की तरह रहा है। शुरुआती दौर के कांटों भरे रास्तों से लेकर आज की सफलता के मुकाम तक, उन्होंने एक मजबूत स्तंभ की तरह चैनल को नई ऊंचाइयां प्रदान की हैं। आज ND Live केवल एक न्यूज़ पोर्टल नहीं, बल्कि 'बेखौफ, निडर और निष्पक्ष' पत्रकारिता का अंतरराष्ट्रीय मानक बन चुका है सलाउद्दीन खान का पैगाम: जनता के नाम "मैंने अकेले चलना शुरू किया था, आज कारवां साथ है। माँ का प्यार नसीब नहीं हुआ तो क्या हुआ... आज हज़ारों दर्शकों का दुलार और पिता का आशीर्वाद मेरी सबसे बड़ी ढाल है। मेरा हर दिन, मेरी हर खबर, मेरे महराजगंज की माटी और इस देश के अन्नदाताओं व मज़दूरों को समर्पित है।मरेंगे देश के लिए, जिएंगे देश के लिए, आ पड़ी जरूरत तो लड़ेंगे देश के लिए।" वरिष्ठ पत्रकार सलाउद्दीन खान (मुख्य संपादक)

लखनऊ ✍️ Chief Editor salauddin Khan Lucknow। Suman Dubey Executive Chairperson Editor-in-Chief

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