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*खाकी की सुस्ती या चोरों की चुस्ती? गोंडा थाने की नाक के नीचे से उड़ी किसानों की संपत्ति, कागजों में सिमटी पुलिसिया कार्रवाई* *अलीगढ़ में चोरों का तांडव: गोंडा थाना क्षेत्र में एक ही रात में दर्जनों ट्यूबवेलों के ताले टूटे, किसानों में भारी आक्रोश* *प्रशासन मौन, चोरों के हौसले बुलंद: गांव गदा खैरा में ट्यूबवेलों से मोटर और स्टार्टर पार, पुलिस की गश्त पर उठे गंभीर सवाल* *ब्यूरो रिपोर्ट: नीरज पाठक, अलीगढ़*

📍 उत्तर प्रदेश (अलीगढ़) 📅 14 May 2026 ✍️ NDLIVE ब्यूरो
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*खाकी की सुस्ती या चोरों की चुस्ती? गोंडा थाने की नाक के नीचे से उड़ी किसानों की संपत्ति, कागजों में सिमटी पुलिसिया कार्रवाई*

*अलीगढ़ में चोरों का तांडव: गोंडा थाना क्षेत्र में एक ही रात में दर्जनों ट्यूबवेलों के ताले टूटे, किसानों में भारी आक्रोश*

*प्रशासन मौन, चोरों के हौसले बुलंद: गांव गदा खैरा में ट्यूबवेलों से मोटर और स्टार्टर पार, पुलिस की गश्त पर उठे गंभीर सवाल*

*ब्यूरो रिपोर्ट: नीरज पाठक, अलीगढ़*

अलीगढ़।

उत्तर प्रदेश के जनपद अलीगढ़ में कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाते हुए अपराधियों ने पुलिसिया इकबाल को खुली चुनौती दे डाली है। जनपद में चोरी की वारदातों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीती रात थाना गोंडा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव गदा खैरा में अज्ञात चोरों ने एक साथ दर्जनों ट्यूबवेलों को निशाना बनाकर खाकी की सुरक्षा व्यवस्था को तार-तार कर दिया। चोरों ने न केवल ट्यूबवेलों के ताले तोड़े, बल्कि वहां से भारी संख्या में मोटर और स्टार्टर पार कर ले गए, जिससे अन्नदाताओं को अपूर्णीय आर्थिक क्षति पहुँची है।

अंधेरे में सुरक्षा, रसातल में कानून

स्थानीय ग्रामीणों और पीड़ित किसानों का सीधा आरोप है कि क्षेत्र में पुलिस की गश्त केवल कागजी खानापूर्ति और सरकारी फाइलों तक सीमित रह गई है। अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि उन्हें कानून का जरा भी खौफ नहीं बचा है। एक ही रात में दर्जनों स्थानों पर नियोजित तरीके से सेंधमारी करना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि अपराधी बेखौफ हैं और इलाका पुलिस गहरी नींद में सोई हुई है। सवाल यह उठता है कि जब किसान अपने खेतों में मेहनत कर रहा है, तब पुलिस की 'चौकसी' कहाँ लुप्त है?

प्रशासनिक निष्क्रियता पर उठते तीखे सवाल

घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ पूरी तरह खाली हैं। अधिकारियों द्वारा मामले में केवल औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं, जबकि धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई या अपराधियों की धरपकड़ नजर नहीं आ रही। किसानों का आक्रोश चरम पर है; उनका कहना है कि वे पहले ही प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहे हैं, और अब प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण चोरों की लूट ने उनकी कमर तोड़ दी है। क्या अधिकारी केवल 'सब ठीक है' की रिपोर्ट भेजने के लिए ही कुर्सियों पर बैठे हैं?

हक की हुंकार और अंतिम चेतावनी

क्षेत्र की जनता में इस घटना को लेकर भारी उबाल है। किसानों ने दो टूक शब्दों में शासन-प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि अविलंब चोरी गई संपत्ति की बरामदगी नहीं हुई और दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो वे उग्र आंदोलन और चक्का जाम के लिए विवश होंगे। अब यह देखना शेष है कि अलीगढ़ पुलिस अपनी कार्यशैली में सुधार कर अपराधियों को सलाखों तक पहुँचाती है या उच्चाधिकारियों की फाइलों में इसी तरह 'परमानेंट' खानापूर्ति और सुस्ती का खेल जारी रहेगा।

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