*निचलौल पुलिस: रक्षक या भक्षक? दलालों की गिरफ्त में कानून की मर्यादा"* *सवालों के घेरे में 'कारखास': आखिर थाने के भीतर निजी लोगों का हस्तक्षेप किसके आदेश पर हो रहा है?* *अंधा कानून: रेस्टोरेंट्स में चल रही अवैध गतिविधियों पर पुलिस की 'मौन सहमति' का राज क्या है?* *प्रशासनिक लकवा: क्या महराजगंज के आला अधिकारियों को निचलौल में चल रहे इस 'वसूली उद्योग' की भनक नहीं है?* *ब्यूरो रिपोर्ट: सलाउद्दीन खान महराजगंज* *"निचलौल थाने का काला चिट्ठा", "दलालों का थाना", "खाकी पर कालिख"।* *सुर्खियां: निचलौल थाने में 'खाकी' के समानांतर 'दलाल तंत्र' का कब्जा; इंसाफ की चौखट पर वसूली का 'रेट कार्ड' हावी!* *सिरौली कांड से लेकर रेस्टोरेंट की आड़ में चलते 'अनैतिक साम्राज्य' तक; क्या महराजगंज पुलिस ने बिचौलियों के आगे घुटने टेक दिए हैं?* महराजगंज/निचलौल। उत्तर प्रदेश पुलिस का स्लोगन है 'मित्र पुलिस', लेकिन निचलौल थाना क्षेत्र में यह 'दलाल पुलिस' के नए अवतार में नजर आ रही है। स्थानीय सूत्रों और पीड़ितों की सिसकियों ने पुलिसिया पारदर्शिता के दावों को तार-तार कर दिया है। आरोप है कि यहाँ खाकी की कमान अधिकारियों के हाथ में नहीं, बल्कि उन 'सफेदपोश कारखास' लोगों के हाथ में है जो थाने की बेंच पर बैठकर न्याय का सौदा करते हैं। सिस्टम की सड़ांध: जब दलाल बनें 'न्यायाधीश' थाने में प्रवेश करते ही फरियादी को सीधा अधिकारी नहीं, बल्कि 'बिचौलियों की दीवार' मिलती है। आरोप है कि एफआईआर से लेकर सुलह-समझौते तक, हर काम के लिए 'रेट' निर्धारित है। निचलौल थाने का यह 'अदृश्य दलाल तंत्र' इतना मजबूत है कि बिना 'चढ़ावे' के कानून की कलम नहीं चलती। सिरौली कांड: वसूली की पराकाष्ठा 30 अप्रैल 2026 का सिरौली कांड इसका जीता-जागता प्रमाण है। जमीन विवाद में न्याय दिलाने के नाम पर पीड़ित पक्ष का खून चूसने के बाद भी जब अधिकारियों का मन नहीं भरा, तो कागजात देने के बदले अतिरिक्त सुविधा शुल्क की मांग की गई। यह सीधे तौर पर प्रशासनिक डकैती है। अनैतिकता का संरक्षण: रेस्टोरेंट या 'पाप की मंडी'? कस्बे के पॉश रेस्टोरेंट्स में चल रहे अनैतिक व्यापार और जिस्मफरोशी के आरोपों ने पुलिस की साख को धूल धूसरित कर दिया है। आरोप है कि इन ठिकानों से 'खाकी के खास' लोगों तक हर महीने मोटी रकम पहुँचती है, जिसके बदले कार्रवाई के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति की जाती है।
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