शून्य से शिखर तक: संघर्ष, सत्य और संकल्प की एक "महागाथा" 1. मिट्टी का लाल: प्रारंभिक जीवन और अग्नि-परीक्षा उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के छोटे से गांव 'जमुई पंडित' की माटी ने एक ऐसे व्यक्तित्व को गढ़ा है, जिसका जीवन चुनौतियों की भट्टी में तपकर कुंदन बना है। 01 जनवरी 1999 को जन्मे सलाउद्दीन खान का बचपन संघर्षों की दास्तां रहा। जहाँ बचपन में सिर पर माँ का आँचल नसीब नहीं हुआ, वहीं पिता की दुआओं और उनके साये ने सलाउद्दीन को टूटने नहीं दिया। माँ की कमी ने उन्हें कमजोर नहीं, बल्कि दुनिया से लड़ने के लिए फौलाद बना दिया। 2. रगों में दौड़ता जुनून: जब लकड़ी का टुकड़ा बना 'माइक' जब हमउम्र बच्चे खिलौनों से खेलते थे, तब नन्हे सलाउद्दीन के हाथों में लकड़ी का एक टुकड़ा होता था, जिसे वे अपना काल्पनिक माइक मानते थे। बचपन की वह जिज्ञासा कि "सच को दुनिया के सामने लाना है", आगे चलकर उनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य बन गई। महराजगंज की गलियों में एक पुरानी साइकिल पर सवार होकर उन्होंने अपने सपनों का पीछा करना शुरू किया। उस साइकिल के पहियों के साथ सलाउद्दीन के बुलंद इरादों ने भी ऐसी रफ्तार पकड़ी कि पीछे मुड़कर नहीं देखा। 3. ND Live का उदय: निष्पक्षता की एक नई 'लिगेसी' विभिन्न राष्ट्रीय न्यूज़ चैनलों में वर्षों के कड़े अनुभव के बाद, सलाउद्दीन जी ने महसूस किया कि शोषितों और वंचितों की आवाज़ बनने के लिए एक निडर मंच की आवश्यकता है। इसी संकल्प का परिणाम है: 01 जनवरी 2024: पत्रकारिता के नए सूर्य 'ND Live' की नींव रखी गई। 01 जनवरी 2026: डिजिटल क्रांति की ओर कदम बढ़ाते हुए चैनल की आधिकारिक वेबसाइट का वैश्विक शुभारंभ हुआ। 4. स्तंभ और सारथी: टीम वर्क की शक्ति सलाउद्दीन खान जी के इस ऐतिहासिक सफर में चीफ एडिटर "शीला पाण्डेय" जी का योगदान एक चट्टान की तरह रहा है। शुरुआती दौर के कांटों भरे रास्तों से लेकर आज की सफलताओं तक, उन्होंने एक मजबूत स्तंभ की तरह चैनल को नई ऊंचाइयां दी हैं। आज ND Live केवल एक न्यूज़ पोर्टल नहीं, बल्कि 'बेखौफ, निडर और निष्पक्ष' पत्रकारिता का अंतरराष्ट्रीय मानक बन चुका है। 5. सलाउद्दीन खान का पैगाम: जनता के नाम "मैंने अकेले चलना शुरू किया था, आज कारवां साथ है। माँ का प्यार नसीब नहीं हुआ तो क्या हुआ... आज हज़ारों दर्शकों का दुलार और पिता का आशीर्वाद मेरी सबसे बड़ी ढाल है। मेरा हर दिन, मेरी हर खबर, मेरे महराजगंज की माटी और इस देश के अन्नदाताओं-मजदूरों को समर्पित है।"
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