महराजगंज: अधिवक्ता विनय पांडेय ने प्रधानमंत्री को भेजा पत्र, 'अनिवार्य सरकारी शिक्षा नीति' लागू करने की उठाई मांग

महराजगंज: अधिवक्ता विनय पांडेय ने प्रधानमंत्री को भेजा पत्र, 'अनिवार्य सरकारी शिक्षा नीति' लागू करने की उठाई मांग।" महराजगंज से राम केवल शर्मा की रिपोर्ट महराजगंज। भारत की दोहरी शिक्षा व्यवस्था—अमीरों के लिए हाई-टेक निजी स्कूल और गरीबों के लिए बदहाल सरकारी स्कूल—के खिलाफ अब कानूनी गलियारों से आवाज़ उठने लगी है। जनपद महराजगंज के वरिष्ठ अधिवक्ता और 'बॉर्डर लॉयर्स ट्रस्ट' के सह-संस्थापक विनय कुमार पांडेय ने देश के प्रधानमंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन भेजकर 'अनिवार्य सरकारी शिक्षा नीति' लागू करने की मांग की है। ज्ञापन की मुख्य मांग: सरकारी वेतन तो शिक्षा भी सरकारी अधिवक्ता विनय पांडेय ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भेजे ज्ञापन में तर्क दिया है कि जब तक नीति निर्माता (नेता) और नीति लागू करने वाले (IAS/IPS अधिकारी) स्वयं सरकारी व्यवस्था का हिस्सा नहीं बनेंगे, तब तक स्कूलों की स्थिति में गुणात्मक सुधार संभव नहीं है। उन्होंने मांग की है कि सरकारी खजाने से वेतन पाने वाले हर व्यक्ति के लिए अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना अनिवार्य किया जाए। इलाहाबाद हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का हवाला ज्ञापन में साल 2015 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय (न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल) के उस ऐतिहासिक फैसले का जिक्र किया गया है, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि सरकारी स्कूलों की बदहाली का मुख्य कारण प्रभावशाली लोगों के बच्चों का वहां न पढ़ना है। जिस दिन बड़े अधिकारियों के बच्चे वहां पढ़ने लगेंगे, स्कूलों की व्यवस्था रातों-रात सुधर जाएगी। नेपाल और फिनलैंड से सीख लेने की सलाह अधिवक्ता ने ज्ञापन में पड़ोसी देश नेपाल का उदाहरण दिया, जहाँ हाल ही में जनप्रतिनिधियों के बच्चों के लिए सरकारी शिक्षा अनिवार्य की गई है। साथ ही फिनलैंड जैसे देशों का जिक्र करते हुए बताया कि वहां अमीर-गरीब का भेद मिटाकर सबको एक जैसी श्रेष्ठ शिक्षा दी जाती है। राष्ट्र निर्माण के लिए क्रांतिकारी कदम विनय कुमार पांडेय का मानना है कि यदि यह नीति लागू होती है तो: निजी स्कूलों की लूट और 'शिक्षा माफिया' पर लगाम लगेगी। सरकारी स्कूलों में जवाबदेही (Accountability) बढ़ेगी और मिड-डे मील से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर तक सब बेहतर होगा। समाज के हर वर्ग के बच्चे एक साथ बैठकर पढ़ेंगे, जिससे असली सामाजिक न्याय सुनिश्चित होगा। JURM TV के लिए हेडलाइन विकल्प (Short & Sharp): विकल्प 1 (तीखा): नेताओं और अफसरों के बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ेंगे तभी सुधरेगा देश? PMO पहुँचा बड़ा ज्ञापन! विकल्प 2 (संवैधानिक): शिक्षा में समानता की जंग: अधिवक्ता विनय पांडेय ने उठाई 'अनिवार्य सरकारी शिक्षा' की मांग। विकल्प 3 (वायरल): सरकारी वेतन लो तो सरकारी स्कूल में पढ़ाओ! महराजगंज से उठी देशव्यापी बदलाव की आवाज़। डिस्क्रिप्शन (Social Media Description): "क्या भारत में भी नेपाल की तरह नेताओं के बच्चों के लिए सरकारी स्कूल अनिवार्य होने चाहिए? महराजगंज के अधिवक्ता विनय कुमार पांडेय ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। देखिए ND Live

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