महाराजगंज: पत्रकारिता 'ब्रैंड' है, बहरूपियों का खेल नहीं— CEO सलाउद्दीन खान का मास्टर स्ट्रोक

महाराजगंज: पत्रकारिता 'ब्रैंड' है, बहरूपियों का खेल नहीं— CEO सलाउद्दीन खान का मास्टर स्ट्रोक महराजगंज: पत्रकारिता के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहे न्यूज़ नेटवर्क ND Live के तत्वावधान में एक ऐतिहासिक महा-सम्मेलन का आयोजन हुआ। संस्थान के संस्थापक और CEO सलाउद्दीन खान ने अपने जन्मदिवस के अवसर पर पत्रकारों के साथ सीधा संवाद किया और एक ऐसी लकीर खींच दी, जिससे असली और दिखावटी पत्रकारों के बीच का अंतर साफ़ हो गया। "चेहरे से होनी चाहिए पत्रकार की पहचान, कार्ड से नहीं" मीटिंग को संबोधित करते हुए CEO सलाउद्दीन खान ने बेहद कड़े लहजे में कहा कि पत्रकारिता कोई खिलौना नहीं है जिसे कोई भी 300-500 रुपये देकर उठा ले। उन्होंने कहा— "असली पत्रकार वो है जिसकी धमक उसके काम और उसके चेहरे से होती है। जो लोग केवल आईडी कार्ड पहनकर घूमते हैं और काम के वक्त बहानेबाजी करते हैं, उनके लिए ND Live में कोई जगह नहीं है। हम भीड़ नहीं, विजन वाले पत्रकार चाहते हैं।" उन्होंने प्रशासन से भी आह्वान किया कि ऐसे बहरूपिया पत्रकारों पर कड़ी निगरानी रखी जाए जो पत्रकारिता की आड़ में गलत काम करते हैं। सम्मान और जिम्मेदारी: कर्मठ योद्धाओं को मिला अधिकार इस मौके पर CEO सलाउद्दीन खान ने संस्थान के समर्पित स्तंभों को नियुक्ति पत्र और आईडी कार्ड देकर सम्मानित किया: सदरे आलम: मंडल ब्यूरो चीफ के रूप में कार्ड देकर सम्मानित किया गया। जानवी मिश्रा: स्टार एंकर को नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) और कार्ड सौंपकर नई जिम्मेदारी दी गई। सीमा पाण्डेय: गौरवपूर्ण उपस्थिति के साथ कार्ड देकर सम्मानित किया गया। नंदिनी जी (गोल्डन गर्ल): अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी को विशेष सम्मान पत्र देकर प्रोत्साहित किया गया। मंच पर मौजूद रहे दिग्गज कार्यक्रम में पत्रकारिता और समाज सेवा की बड़ी हस्तियों ने शिरकत की, जिनमें मुख्य रूप से: भाजपा महामंत्री अजय तिवारी (गोरखपुर), वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज कुमार श्रीवास्तव (महराजगंज), दैनिक जागरण संवाददाता रामपाल जायसवाल (कैंपियरगंज), शीला पाण्डेय (सिसवा), पप्पू प्रजापति एवं अन्य महत्वपूर्ण लोग उपस्थित रहे। सलाउद्दीन खान ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में शायरी के साथ बात खत्म की: "बिक जाते हैं कुछ लोग चंद सिक्कों की खनक पर, मगर हम 'ND Live' वाले हैं, जो लहू से इतिहास रचाते हैं!"

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