*डीएम के आदेश की आड़ में निचलौल में सिल्ट माफिया का तांडव, 'फर्जी पत्रकार' बन शासन को दे रहा चुनौती* *डीएम साहब के नाम पर महा-घोटाला! निचलौल में सिल्ट माफिया की जेसीबी ने मचाया तांडव, ND Live का बड़ा खुलासा!* महराजगंज/लखनऊ।उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित ND Live मुख्यालय को मिली विशेष ज़मीनी रिपोर्ट के अनुसार, जनपद महराजगंज की निचलौल तहसील में भ्रष्टाचार और अवैध खनन का एक ऐसा खेल चल रहा है जिसने न केवल सरकारी आदेशों की धज्जियां उड़ा दी हैं, बल्कि ज़िले के सर्वोच्च पद की गरिमा को भी दांव पर लगा दिया है। *DM के नाम का 'ढाल' और बेखौफ अवैध खनन।* हैरतअंगेज मामला नारायणी नदी के देवरिया शाखा के गौनरियां माइनर से सामने आया है। यहाँ कमाल अहमद पुत्र मुस्ताक निवासी मिठौरा द्वारा जेसीबी मशीनें लगवाकर दिन-दहाड़े सिल्ट और बालू का अवैध खनन करवा रहा है। स्थानीय लोगों और पड़ताल करने गई टीम के पूछने पर वह व्यक्ति खुद को 'पत्रकार' बताकर न केवल मीडिया जगत को कलंकित कर रहा है, बल्कि बेहद निर्लज्जता के साथ दावा करता है कि— "डीएम साहब ने मुझे खुद आदेश दिया है कि सिल्ट निकाल कर कहीं भी ले जाओ।" सवाल यह है कि क्या एक फर्जी पहचान वाला व्यक्ति महराजगंज के तेज-तर्रार और ईमानदार जिलाधिकारी के नाम का उपयोग कर अधिकारियों की आंखों में धूल झोंक रहा है, या फिर उसे स्थानीय प्रशासन का मौन संरक्षण प्राप्त है? *बिना 'फार्म-सी' सैकड़ों ट्रॉली की खुली बिक्री।* जिलाधिकारी द्वारा 06 जनवरी 2026 को जारी आदेश में स्पष्ट था कि सिल्ट का उठान केवल प्रपत्र 'सी' (फार्म-सी) के माध्यम से और सिंचाई विभाग की कड़ी निगरानी में होगा। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि गौनरियां माइनर पर हो रहे सिल्ट खदान बिना फार्म-सी परिवहन द्वारा कराया जा रहा हैं।जिसके द्वारा सैकड़ों ट्रॉली सिल्ट खुले बाजार में बेची जा रही है। खनन अधिकारी और और सिंचाई विभाग का रवैया दाल में काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली होने का संकेत दे रहा है। *स्थानीय पुलिस और तहसील प्रशासन की भूमिका संदिग्ध।* सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस क्षेत्र में दिन-रात जेसीबी दहाड़ रही हो और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का काफिला गुज़र रहा हो, क्या वहां की स्थानीय थाना पुलिस और चौकी को इसकी भनक नहीं? अगर पुलिस को पता है और कार्यवाही नहीं हो रही, तो क्या छोटे अधिकारियों ने माफिया से सांठगांठ कर ली है? क्या बड़े अधिकारियों को गुमराह करने के लिए ज़मीनी रिपोर्ट दबाई जा रही है? *राजस्व को चपत और संरचनात्मक खतरा।* नहर की पटरियों को काटकर अवैध खुदाई के कारण नहरों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। यह केवल बालू की चोरी नहीं है, बल्कि भविष्य में आने वाली सिंचाई व्यवस्था की बर्बादी की पटकथा है। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत करने पर यह 'कथित पत्रकार' उन्हें धमकाता है और डीएम साहब का नाम लेकर रौब झाड़ता है। *ND Live की दो टूक: कब जागेगा प्रशासन?* जनपद महराजगंज के जिलाधिकारी अपनी कार्यकुशलता के लिए जाने जाते हैं, लेकिन उनके नाम का दुरुपयोग कर यह भू-माफिया सीधे शासन को चुनौती दे रहा है। ND Live की पड़ताल में यह साफ हो गया है कि वह व्यक्ति पत्रकार नहीं, बल्कि एक पेशेवर माफिया है जो रसूखदारों के नाम की आड़ लेकर अवैध साम्राज्य चला रहा है। *अधिकारियों के लिए अनुत्तरित प्रश्न:* बिना फार्म-सी जारी हुए परिवहन करने वाले वाहनों को अब तक सीज क्यों नहीं किया गया? डीएम साहब के नाम का गलत इस्तेमाल करने वाले 'फर्जी पत्रकार' पर मुकदमा कब दर्ज होगा? क्या सिंचाई विभाग और खनन विभाग की चुप्पी किसी बड़े घोटाले का हिस्सा है? ND Live इस खबर पर पैनी नज़र बनाए हुए है। लखनऊ कार्यालय इस मामले की पूरी रिपोर्ट शासन और संबंधित विभागों को भेजने की तैयारी में है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस 'सिस्टम की दीमक' पर कब और कैसी कार्यवाही करता है। ब्यूरो रिपोर्ट: ND Live न्यूज़ प्रशासनिक मुख्यालय: राजीव नगर, इंदिरा नगर, लखनऊ
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