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विशेष कवरेज: "चाहे कड़वा लगे या मीठा, बोलूँगा तो सच ही!"— मजीद आलम की दहाड़ ने बदली जमुई पंडित की चुनावी दिशा

📍 उत्तर प्रदेश (महराजगंज ) 📅 29 Jan 2026 ✍️ NDLIVE ब्यूरो
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विशेष कवरेज: "चाहे कड़वा लगे या मीठा, बोलूँगा तो सच ही!"— मजीद आलम की दहाड़ ने बदली जमुई पंडित की चुनावी दिशा

रिपोर्ट : ND Live News

Chief Executive Officer (CEO) सलाउद्दीन खान

मिठौरा, महराजगंज | विशेष विश्लेषण

महराजगंज जिले के मिठौरा विकासखंड की ग्राम सभा जमुई पंडित में इस बार का चुनाव कोई साधारण चुनाव नहीं रह गया है। यह लड़ाई अब 'सच' बनाम 'दिखावे' की हो चुकी है। पूर्व बीडीसी और तेज-तर्रार भोजपुरिया रिपोर्टर मजीद आलम ने अपनी चुनावी सभाओं में एक ऐसी बात कह दी है, जिसने पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है।

"वोट उसे दो जो लायक हो, मुझे नहीं!"— मजीद आलम की बेबाकी

मजीद आलम ने जनता के बीच हाथ जोड़कर नहीं, बल्कि सीना तानकर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा— "मैं यह नहीं कहता कि मुझे ही बीडीसी बनाओ, लेकिन उसे बनाओ जो उस पद के लायक हो। उसे चुनो जो तुम्हारी समस्या को लेकर आधी रात को भी थाने की दहलीज पर खड़ा हो सके। उसे चुनो जिसकी जुबान पर सच हो, भले ही वो कड़वा क्यों न हो।"

सच्चाई की तीखी धार: "फर्क नहीं पड़ता किसे बुरा लगा"

मजीद आलम ने अपनी शैली में स्पष्ट कर दिया कि पंचायत के विकास और न्याय के लिए उनकी बातें अगर किसी को 'तीखी' लगती हैं, तो उन्हें इसकी परवाह नहीं है। उन्होंने कहा कि— "पंचायत की चौपाल हो या पुलिस का थाना, जो सत्य होगा वही बोलूँगा। मेरी बातें कड़वी लग सकती हैं, लेकिन वो सच की नींव पर होंगी। मैं चापलूसी करके किसी को खुश करने के लिए राजनीति में नहीं आया हूँ।"

भ्रष्टाचार मुक्त सेवा का संकल्प: "काम होगा बिल्कुल मुफ्त"

मजीद भाई का सबसे बड़ा वादा उनकी ईमानदारी है। उन्होंने घोषणा की है कि अगर जनता उन्हें मौका देती है, तो गांव का हर काम बिल्कुल मुफ्त होगा। किसी गरीब को अपने हक के लिए एक रुपया भी नहीं देना पड़ेगा।

"माना कि हर किसी को खुश करना मेरे बस में नहीं है , पर मैं वादा करता हूँ कि सबको एक साथ लेकर चलने की ईमानदारी से कोशिश करूँगा।"

24 घंटे की हाजिरी और निडर नेतृत्व

मजीद आलम ने बुजुर्गों और युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि एक ऐसा प्रतिनिधि चुनिए जो निडर हो। उन्होंने अपील की— "मेरे बड़े बुजुर्गों, भाइयों और दोस्तों, आप ऐसा प्रधान या बीडीसी चुनिए जो आपके हक के लिए किसी से भी टकरा सके। मुझे पद का लालच नहीं, मुझे तो जमुई पंडित के सम्मान की फिक्र है। मैं आपके लिए 24 घंटे हाजिर रहूँगा।" "हक की खातिर जो लड़ न सके वो बेकार है,

जो सच न बोल सके वो कैसा पहरेदार है?

मजीद आलम खड़ा है सीना तान कर मैदान में,

अब फैसला तुम्हारे हाथ, किसका इंतज़ार है?" एक समर्थक ने पूछा— "मजीद भाई, दुश्मन बहुत हैं आपके, डर नहीं लगता?"

मजीद भाई ने मुस्कुराकर कहा— "भाई, रिपोर्टर की कलम और नेता का जिगर जब एक हो जाए, तो डर खुद रास्ता बदल लेता है। मैं तो वो आईना हूँ जिसमें विरोधियों को अपनी कमियां साफ़ दिखती हैं, इसीलिए वो मुझसे डरते हैं!"

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