*शाहजहांपुर में SOG की दबिश और पुलिसिया गुंडई पर पत्रकारों का फूटा आक्रोश: वरिष्ठ पत्रकार सलाउद्दीन खान की दो टूक— 'पत्रकारिता पर आंच आई तो चुप नहीं बैठेंगे' | ND Live* *लखनऊ से वरिष्ठ पत्रकार सलाउद्दीन खान की विशेष रिपोर्ट*
*शाहजहांपुर में SOG की दबिश और पुलिसिया गुंडई पर पत्रकारों का फूटा आक्रोश: वरिष्ठ पत्रकार सलाउद्दीन खान की दो टूक— 'पत्रकारिता पर आंच आई तो चुप नहीं बैठेंगे' | ND Live*
*लखनऊ से वरिष्ठ पत्रकार सलाउद्दीन खान की विशेष रिपोर्ट*
शाहजहांपुर/लखनऊ:
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में पुलिस प्रशासन और मीडिया के बीच उपजे तनाव ने अब विकराल रूप ले लिया है। बेलगाम SOG टीम की तानाशाही और अधिकारियों की मनमानी कार्यशैली के खिलाफ जिलेभर के पत्रकारों का रोष सड़क पर उतर आया है। कोई भी पत्रकार , हर कलमकार का सम्मान सर्वोपरि है—जब-जब प्रशासन गुंडागर्दी पर उतरेगा, तब-तब पत्रकारों को अपने हक के लिए ठोस और कड़े कदम उठाने ही होंगे।
क्या है पूरा घटनाक्रम?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शाहजहांपुर की SOG टीम ने चिनौर रोड पर बाइक से जा रहे एक स्थानीय टीवी चैनल के पत्रकार प्रभाकर मिश्रा और विशेक मिश्रा को जबरन हिरासत में ले लिया था और उन्हें अपने साथ उठा ले गई थी। हैरानी की बात यह थी कि इस अवैध कार्रवाई के संबंध में कई घंटों तक स्थानीय मीडिया को कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई। बाद में सूत्रों से यह बात सामने आई कि डिप्टी सीएम बृजेश पाठक के दौरे के दौरान काले झंडे दिखाने से जुड़े एक वायरल वीडियो के मामले में यह कार्रवाई की गई है।
जब पत्रकारों को अपने साथियों के इस तरह उठाए जाने की भनक लगी, तो वे बड़ी संख्या में रिजर्व पुलिस लाइन स्थित SOG के इंटरोगेशन रूम जा पहुंचे। विरोध के स्वर तेज होने और कोई भी पुख्ता साक्ष्य सामने न आने पर पुलिस के पसीने छूट गए और उसे मजबूरन दोनों पत्रकारों को छोड़ना पड़ा। आरोप है कि इस दौरान जब मीडिया ने मामले की सच्चाई जाननी चाही, तो पुलिस अधीक्षक (SP) की ओर से बेहद गैर-जिम्मेदाराना भाषा का प्रयोग किया गया, जिससे पत्रकारों में असंतोष की आग भड़क उठी।
प्रेस क्लब की बैठक और कलेक्ट्रेट का घेराव
इस शर्मनाक घटना से आहत होकर जिले के तमाम पत्रकारों और मीडिया संगठनों ने प्रेस क्लब में एक आपातकालीन बैठक बुलाई। बैठक के बाद सभी पत्रकार एकजुट होकर नारेबाजी करते हुए पैदल मार्च निकालते हुए विकास भवन व कलेक्ट्रेट परिसर जा पहुंचे।
चूंकि उसी दौरान वहां मंत्रियों की एक महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित थी, इसलिए पत्रकारों ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि जब तक प्रशासनिक मुखिया आकर सीधी बात नहीं करेंगे, तब तक कोई भी परिसर से बाहर नहीं जाएगा। पत्रकारों के इस अनुशासित लेकिन आक्रामक तेवर को देखते हुए प्रशासन में हड़कंप मच गया और भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
वरिष्ठ पत्रकार सलाउद्दीन खान की दो टूक: "प्रशासन की गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं होगी"
इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर रखते हुए लखनऊ से वरिष्ठ पत्रकार और सलाउद्दीन खान ने दो टूक शब्दों में प्रशासनिक अधिकारियों को चेताया है। हर कलमकार का सम्मान एक समान और सर्वोपरि है। यदि पुलिस और प्रशासन यह समझता है कि वे वर्दी की धौंस दिखाकर और तानाशाही अपनाकर पत्रकारों की आवाज दबा लेंगे, तो यह उनकी बहुत बड़ी भूल है। अगर प्रशासन और SOG जैसी टीमें अपनी हदें भूलकर गुंडागर्दी पर उतरेंगी, तो पत्रकारों को भी अपने मान-सम्मान की रक्षा के लिए ठोस और कड़े कदम उठाने पड़ेंगे। ND Live हमेशा सच्चाई के साथ खड़ा है और पत्रकारों के उत्पीड़न के खिलाफ हर मोर्चे पर आर-पार की लड़ाई लड़ेगा।"
एसपी और पत्रकारों के बीच मैराथन वार्ता और बैकफुट पर पुलिस
बढ़ते दबाव और मीडिया की चट्टानी एकता के बीच पुलिस अधीक्षक सौरभ दीक्षित विकास भवन पहुंचे, जहां कलेक्ट्रेट सभागार में पत्रकारों के साथ उनकी लंबी और गंभीर वार्ता हुई।
चर्चा के दौरान एसपी को आखिरकार झुकना पड़ा और उन्होंने माना कि संवादहीनता और प्रशासनिक स्तर पर हुई गंभीर त्रुटि के कारण यह अप्रिय स्थिति उत्पन्न हुई। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में इस तरह की हरकत दोबारा नहीं होगी। साथ ही, पत्रकारों की ओर से SOG प्रभारी और संबंधित दोषी टीम के विरुद्ध की गई कार्रवाई की मांग पर एसपी ने ज्ञापन लेकर निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया।
ND Live की सीधी बात:
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर इस तरह का प्रशासनिक दबाव और तानाशाही किसी भी कीमत पर सहन नहीं की जाएगी। जब-जब खाकी कानून को ताक पर रखकर पत्रकारों पर हाथ डालेगी, तब-तब कलम के सिपाही एकजुट होकर ईंट से ईंट बजाना जानते हैं।
"हम किसी सत्ता या दबाव के आगे झुकते नहीं, बल्कि मैदान पर उतरकर सीधे सच को आपके सामने लाते हैं। जमीनी हकीकत, निष्पक्ष पत्रकारिता और आपकी आवाज़ को बुलंद करना ही हमारा धर्म है।
"हम किसी सत्ता या दबाव के आगे झुकते नहीं, बल्कि मैदान पर उतरकर सीधे सच को आपके सामने लाते हैं। जमीनी हकीकत, निष्पक्ष पत्रकारिता और आपकी आवाज़ को बुलंद करना ही हमारा धर्म है। फर्जी खबरों के दौर में असली और पुख्ता सच जानने के लिए ND Live के साथ जुड़े रहें, हमारे हर वीडियो और पोर्टल की खबरों को पूरा देखें और देशहित में ज्यादा से ज्यादा शेयर करें!"
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